माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा
इतिहास एवं महत्व
Spiritual significance and divine guidance
- स्थान एवं स्थिति: उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर दूर, आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर (प्राचीन नाम: लक्ष्मणा) नदी के तट पर यह दिव्य सिद्ध पीठ स्थित है।
- ऐतिहासिक एवं पौराणिक प्रमाण: दिर में विराजित माँ बगलामुखी की मूर्ति पांडवकालीन है, जिसका उल्लेख 'कालिका पुराण' में भी मिलता है। द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर पांडवों ने यहाँ माँ बगलामुखी की साधना की थी। दस महाविद्याओं में माँ बगलामुखी आठवीं महाविद्या हैं, जिनकी साधना अचूक और सिद्ध फलदायी मानी जाती है।
- त्रिशक्ति स्वरूप: गर्भगृह में बीच में माँ बगलामुखी, दाईं ओर महालक्ष्मी और बाईं ओर माँ सरस्वती पिंडी रूप में विराजित हैं।
- प्राकृतिक एवं तांत्रिक वातावरण: यह स्थान तंत्र और साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मंदिर की चारों दिशाओं में प्राचीन काल से मुक्तिधाम (श्मशान) स्थित हैं। परिसर में बेलपत्र, चंपा, सफेद आंकड़ा, आंवला, नीम और पीपल के वृक्ष एक साथ विद्यमान हैं। नदी के किनारे कई महान संतों की समाधियां हैं, जो इसके प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र होने का प्रमाण देती हैं।
- स्थापत्य एवं परिसर: सभा मंडप: मंदिर परिसर में 16 खंभों वाला भव्य सभा मंडप है, जिसका निर्माण संवत 1815 (276 ई.पू.) में पंडित ईबूजी दक्षिणी कारीगर श्री तुलाराम द्वारा कराया गया था।
- दीपमाला: मंदिर के सम्मुख स्थित 32 फीट ऊंची ऐतिहासिक दीपमाला का निर्माण महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था।
- अन्य देवालय: प्रांगण में दक्षिणमुखी हनुमान जी, उत्तरमुखी राधा-कृष्ण, पूर्वमुखी भैरव जी का मंदिर और प्रसिद्ध सिंहमुखी द्वार स्थित है।
समय एवं आरती
माँ बगलामुखी मंदिर समय-सारणी
दर्शन का समय:सामान्य दिन: प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक | नवरात्रि एवं विशेष पर्व: प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक
आरती का समय:मंगला आरती (प्रातः): सुबह 6:00 बजे | संध्या आरती: शाम 7:30 बजे
हवन एवं पूजन: नवरात्रि के दौरान सुबह और शाम की आरती के समय को छोड़कर पूरे दिन हवन एवं अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
मंदिर का स्थान
बगलामुखी सिद्ध पीठ, नलखेड़ा पधारें
Nalkheda, Madhya PradeshTemple guidance available
